रिपोर्ट-नरेन्द्र सिंह
प्रयागराज : जनपद में सदर तहसील क्षेत्र के जनका, मर्दापुर, तेवारा गांव के समीप दर्जनों मानक विहीन संचालित हो रहे ईट भट्ठा के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से अवैध ईंट भट्ठा संचालकों की संख्या बढ़ती जा रही है, हालांकि, ऐसी बात नहीं है कि अवैध ईंट-भट्ठों पर विभाग की नजर नहीं है, परंतु, लक्ष्मी पूजन के बल पर इन गांवों के समीप धड़ल्ले से मानक विहीन ईंट-भट्ठे चल रहे हैं, विभाग द्वारा इन लोगों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से अवैध ईट भट्टों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां मानकों की धज्जियां उड़ा रहे अनगिनत ईट भट्ठे चल रहे है, इससे पर्यावरण प्रदूषित हो ही रहा है साथ ही राजस्व को होने वाले आय का भी नुकसान हो रहा है, अन्य विभाग की तो बात छोड़िए, खनन विभाग ने भी कोई ठोस कार्यवाही करने से कतराता रहता है, इन्हीं भट्ठों बच्चों से ईट पथाई का कार्य भी कराया जाता है, बच्चों का बचपन छीन कर उन्हें शिक्षा विहीन कर रहे हैं, कुछ स्थानों पर कागजी कार्यवाही करके अवैध वसूली कर खानापूर्ति की जा रही है, इससे ईट भट्ठा संचालकों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि यह लोग बड़े पैमाने पर ईट का निर्माण कर शासकीय एवं निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं, सदर तहसील के इन गांवों के समीप कई ऐसे ईट भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं जिनका मानक से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है, इसके बावजूद भी कार्यवाही नहीं हो रही है, इन अवैध ईट भट्ठा के संचालकों से मिलीभगत के चलते जिम्मेदारों द्वारा कागजी कार्यवाही करने की खानापूर्ति कर दी जाती है, इतना ही नहीं उत्खनन और इनके परिवहन पर भी नियंत्रण नहीं है, ओवरलोडिंग पर रोक के लिए भी जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों को भी ताक पर रख छोड़ा है । जिससे भट्ठा संचालक राजस्व को ठेंगा दिखा कर पर्यावरण को भी हानि पहुंचाने का काम कर रहे हैं, साथ ही वायु को प्रदूषित करने और जमीन की उर्वरा शक्ति को कम करने में ईट भट्ठे संचालक अपनी खूब भूमिका निभा रहे हैं, भट्ठा प्रदूषण ना फैलाएं, इसके लिए इनके संचालन का नियम काफी सख्त रखा गया है, इसके बावजूद भी इस दिशा में नियमों के अनुपालन पर किसी का ध्यान नहीं है, यहां गांवों के समीप अधिकांश ईट भट्ठे मानक विहीन तरीके से संचालित किए जा रहे है, जबकि, न्यायालय एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने बगैर पर्यावरण सर्टिफिकेट के ईट भट्ठों के संचालन पर रोक लगा रखी है, फिर भी ईट-भट्ठा संचालकों को सामाजिक सरोकार के निर्वहन में प्रदूषण के मानकों और पर्यावरण की कोई चिंता नहीं है ।
एक ईंट भट्ठे से लगभग 750 एसएमपी प्रदूषण होता है इसको कम करने की कवायद जारी है, ईट भट्ठा संचालन की नई टेक्नोलॉजी से प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया जा रहा है, लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधुनिकीकरण की मुहिम शुरू की गई है, सभी ईट भट्ठों को जिगजैग विधि में परिवर्तित कराने को कहा गया है, इस विधि से ईंट भट्ठे से निकलने वाली राख वातावरण मे नहीं फैलती है, जिसके कारण प्रदूषण कम होता है, नियमानुसार सिस्टम अपग्रेड ना करने पर बोर्ड एवं जिला प्रशासन द्वारा ईट भट्ठों को बंद किया जा सकता है, इसके अलावा ईट निर्माण के लिए मिट्टी खनन करने से पहले भी खनन विभाग अनुमति लेनी होगी, इस अनुमति के बाद बोर्ड से जल और वायु की सहमति प्राप्त करनी होगी, एनओसी लेने के बाद ही ईट भट्ठे का संचालन किया जा सकता है, परन्तु सदर तहसील क्षेत्र के जनका, मर्दापुर तेवारा गांव के समीप दर्जनों मानक विहीन भट्ठे संचालित हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसलिए बेखौफ तरीके से इनका संचालन हो रहा है, जिनके पास पर्यावरण लाइसेंस एवं प्रदूषण विभाग से मिली कोई एनओसी नहीं है, यह गांवों से दो सौ मीटर की दूरी के बजाय सटे हुए हैं, ग्रामीणों ने जिलाधिकारी प्रयागराज का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराकर अवैध भट्ठा संचालकों पर कार्यवाही कराने की मांग किया है ।
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