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सोलह साल पुराने हत्याकांड में दो को मौत की सजा, कोर्ट ने कहा लोकतंत्र पर हमला बर्दाश्त नहीं...

ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह 

मुजफ्फरनगर : सोलह वर्ष पुराने प्रधान पद प्रत्याशी हत्याकांड में मुजफ्फरनगर की अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों प्रमोद चौधरी और सहदेव को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि दिवाकर ने अपने फैसले में कहा कि "ग्राम पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। इस पर हमला लोकतंत्र पर हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।" मामला तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव का है। वर्ष 2010 में ग्राम प्रधान चुनाव की तैयारियों के दौरान गांव निवासी राजवीर सिंह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अभियोजन के अनुसार, प्रमोद चौधरी नहीं चाहता था कि राजवीर चुनाव मैदान में उतरें। इसी रंजिश के चलते 24 अगस्त 2010 को प्रमोद ने अपने साथी सहदेव और दो शूटरों के साथ मिलकर जंगल में राजवीर सिंह को घेर लिया और उन पर छह गोलियां दाग दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

जांच के दौरान मामले में शामिल दोनों शूटर वर्ष 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। शेष दो आरोपियों प्रमोद चौधरी और सहदेव के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए अंतिम सांस तक फांसी पर लटकाने की सजा सुनाई। बताया जा रहा है कि दोषी प्रमोद चौधरी, उत्तर प्रदेश पुलिस के एएसपी अनुज चौधरी का ममेरा भाई है। हालांकि अदालत का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर सुनाया गया है।

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