ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
प्रयागराज : पूरामुफ्ती स्थित मां काली मंदिर के पास शारदीय नवरात्र के अवसर पर लगाए गए दुर्गा पूजा पंडाल में नौ दिनों तक माता रानी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आराधना की गई। नवरात्र के अंतिम दिन महानवमी पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माता रानी का प्रसाद ग्रहण किया और सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा पंडाल में प्रतिदिन माता रानी के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही लगातार भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। धार्मिक आयोजनों में स्थानीय श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे नौ दिनों तक क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा। महानवमी पर आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
अंग्रेजों के जमाने से जुड़ी है मंदिर की मान्यता...
स्थानीय लोगों के अनुसार, पूरामुफ्ती का मां काली मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मां काली यहां आदिकाल से विराजमान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी एयरपोर्ट क्षेत्र के अंदर मां काली की पूजा-अर्चना की जाती थी। आजादी के बाद मंदिर को जीटी रोड के किनारे स्थापित किया गया, जिसके बाद से यहां नियमित रूप से पूजा-पाठ होता आ रहा है।
आस्था का केंद्र है मां काली मंदिर...
स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच मां काली मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। भक्त मां काली की शक्ति और महिमा में विश्वास रखते हैं तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व होने के बावजूद मंदिर का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बनी हुई है। हर वर्ष शारदीय नवरात्र में मंदिर के पास दुर्गा पूजा पंडाल सजाया जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक आयोजनों के बाद महानवमी पर भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाता है।
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