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सिलसिला-ए-चिश्तिया के बुजुर्ग ख्वाजा-ए-ख्वाजगन फकरें, आलमे इंसानियत की भलाई के लिए तालीम और तलकीं दिया करते हैं इंसानियत के लिए...


रिपोर्ट-जैगम हलीम


प्रयागराज : हिंदुस्तान में आता-ए-रसूल ख्वाजा हसन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्ला अलेह के फरमाने अलीशान है उनके इरसादात में मोहब्बत सबसे बड़ा ईमान है आप लोग आपस में भाई भाई हैं एक दूसरों से मोहब्बत करो एक दूसरे पर एहसान करो फिरका परस्ती से बचो मोहब्बत ही सबसे बड़ा ईमान है, कॉम मिल्लत के लिए चिश्तिया-ए-खानदान के बुजुर्ग हर गली कूचे में हर शहरों में आलम में इंसानियत की तबलीग की हमारे बुजुर्गों के यहां ना कोई भेदभाव ना कोई जात पात है यह हमारे चिश्ती-ए-खानदान के जहां जहां भी बुजुर्ग हैं जहां जहां भी दरगाहें हैं वहां हर कौम मिल्लत के लोग जाते हैं और उनकी हाजत रवाई होती है ।


वह अपनी मुरादों को लेकर अपने घर जाते हैं सूफिया एजाम के तमाम बुजुर्ग गोंका सबका मिशन यही रहा है कि आलम में इंसानियत की भलाई के लिए इन्होंने अपनी जिंदगी को कुर्बान किया कॉम मिल्लत की खिदमत की सब की प्यास बुझा ई जहां पर भी हमारे बुजुर्गों ने दिन हैं हर शहर में हर गांव में गली गली कूचे में जाकर तबलीकी आलम-ए-इंसानियत के लिए की कामों मिल्लत की, कभी बुराई नहीं की, हर इंसान को चाहिए कि वह हर मोमिन को एक दूसरे पर एहसान करें, हमारे बुजुर्गों की फरमान है नाफा नहीं दे सकते तो नुकसान ना करो, खुशी नहीं दे सकते तो गम भी नहीं देना चाहिए, तारीफ नहीं कर सकते तो बुराई ना करो, यह हमारे चिश्तिया खानदान के कादरिया खानदान के अबूलवाया खानदान के शहरभर दिया खानदान के नक्शबंदी या खानदान के हसनीय्या अजीजया कामलिया खानदान के सूफिया इकराम हर शहर में हर मोहल्ले में जा जाकर लोगों में मोहब्बत की तालीम, बुजुर्गों की तारीफें, तौवसीफ लोगों को सुनातें हैं, बुजुर्गों को समाए उमरी सुनाते हैं साथ ही हमेशा आलमे इंसानियत की भलाई के लिए तालीम और तलकीं दिया करते हैं आला में इंसानियत के लिए ।


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