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सरकार ने लिया कोचिंग सेंटरों के लिए बड़ा फैसला, कम उम्र के बच्चों को पढ़ाने पर लगेगा जुर्माना...

रिपोर्ट-न्यूज़ एजेंसी 

दिल्ली : सरकार द्वारा शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों को रेगुलेट करने के लिए 2024 की गाइडलाइन जारी कर दी हैं सरकार की यह शिक्षा नीति एनईपी 2020 राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सिद्धांतों पर आधारित है, यह गाइडलाइन मानसिक रूप से छात्रों को स्वस्थ रखने के लिए और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए जारी की गई हैं, शिक्षा मंत्रालय द्वारा राज्य, केंद्रशासित प्रदेश सरकारों को भी इन गाइडलाइंस को फॉलो करने के लिए प्रेरित किया गया है साथ ही ऐसा ना करने वालों पर कानूनी कार्यवाहियों की जानकारी भी दी गई है, इस दिशानिर्देश के अनुसार कोचिंग सेंटरों का एक मॉडल, ढांचे का प्रस्ताव दिया गया है जिसमे रजिस्ट्रेशन, रिन्यूअल और कोएक्टिंग में रजिस्ट्रेशन कैंसल करने के प्रोसेस को भी बताया गया है, जानकारी के लिए आपको बतादें कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए कोचिंग सेंटरों पर नकेल कसने का काम किया है सरकार ने शिक्षण संस्थानों पर नई गाइडलाइन्स जारी करते हुए आदेश दिया कि 16 साल से कम उम्र वाले विद्यार्थी कोचिंग नहीं जा सकते हैं, सरकार ने कहा है कि इन आदेशों की अवहेलना करने वालों पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा, माना जा रहा है कि पिछले कुछ समय से छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आने के बाद सरकार ने कोचिंग सेंटरों पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, देश के शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशानिर्देश के मुताबिक कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिल नहीं कर सकेंगे और अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे, कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश एक कानूनी ढांचे की आवश्यकता को पूरा करने और बेतरतीब तरीके से निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ोतरी को रोकने के लिए हैं ।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिशानिर्देश में कहा गया, ''कोचिंग संस्थानों की एक वेबसाइट होगी जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों ट्यूटर्स की योग्यता, पाठ्यक्रम, पाठ्य सामग्री, पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाएं और लिए जाने वाले शुल्क का अद्यतन विवरण होगा, नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग संस्थानों को उन्हें तनाव से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन पर अनावश्यक दबाव डाले बिना कक्षाएं संचालित करनी चाहिए, दिशानिर्देश में कहा गया है कि कोचिंग संस्थानों को संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में छात्रों को निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए, सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि कोचिंग संस्थान द्वारा एक परामर्श प्रणाली विकसित की जाए जो छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाए ।

सरकार द्वारा जारी किए गए इस गाइडलाइन के बाद फर्जी कोचिंग सेंटर संचालकों में हड़कंप का माहौल है जहां एक तरफ ऐसे कोचिंग चलाने वालों के सर पर चिड़िया नाच रही है वहीं से बच्चों और विभागों को भी काफी राहत मिलेगी सरकार का यह फैसला कितना कारगर साबित होगा यह इसके पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद सामने आ पाएगा ।

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