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स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, कार्यवाही की मांग मांग तेज...

रिपोर्ट-जैगम हलीम 

कौशाम्बी। चायल सर्किल क्षेत्र में संचालित निजी विद्यालयों की वाहन व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल वाहन चालकों और वाहन मालिकों तक सीमित रह जाती है, जबकि विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूली बच्चों से परिवहन शुल्क के नाम पर प्रति छात्र लगभग 1260 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते हैं। इसके बावजूद बच्चों को ले जाने वाले कई वाहन निजी व्यक्तियों के नाम पर संचालित होते हैं। आरोप है कि विद्यालय सीधे अपने नाम से वाहन संचालित करने के बजाय निजी वाहन मालिकों की टाटा सूमो, बोलेरो और अन्य वाहन किराये पर लेकर उनका उपयोग करते हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में किसानों से जमीन खरीदने के बाद उन्हीं लोगों को वाहन खरीदवाकर विद्यालय के लिए किराये पर लगाया जाता है। वाहन चालकों की नियुक्ति और बैठने की व्यवस्था भी विद्यालय प्रबंधन द्वारा कराई जाती है, लेकिन किसी दुर्घटना या कार्यवाही की स्थिति में विद्यालय स्वयं को जिम्मेदारी से अलग बताने का प्रयास करता है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश विद्यालय परिवहन संबंधी कोई आधिकारिक संपर्क नंबर भी सार्वजनिक नहीं करते, जिससे किसी समस्या या दुर्घटना की स्थिति में अभिभावकों को विद्यालय से तत्काल संपर्क करने में कठिनाई होती है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन केवल वाहनों का चालान करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यालय प्रबंधन की भी जवाबदेही तय करें। साथ ही स्कूल वाहनों के संचालन, चालक की योग्यता, सुरक्षा मानकों, परिवहन शुल्क और विद्यालय की जिम्मेदारी की भी नियमित जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों और शिकायतों पर आधारित है। संबंधित विद्यालयों एवं प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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