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मिट्टी की जांच के आधार पर करें उर्वरकों का प्रयोग, पराली जलाने से बचें किसान- डॉ. अजय कुमार...

ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह 

कौशाम्बी : जनपद में संचालित खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र कौशाम्बी की ओर से विकासखंड सिराथू के नारा गांव में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। साथ ही किसानों को सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अजय कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों का लगातार असंतुलित मात्रा में प्रयोग करने से मिट्टी की सेहत और उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। इससे बचने के लिए किसानों को मिट्टी की जांच करानी चाहिए और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा फसलों के पोषण के लिए जैविक खादों का अधिकाधिक उपयोग करने पर जोर दिया।

पराली जलाने से मिट्टी की सेहत को होता है नुकसान...

डॉ. अजय कुमार ने पराली प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसानों को किसी भी परिस्थिति में खेतों में पराली नहीं जलानी चाहिए। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव और मित्र कीट भी नष्ट होते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने की सलाह दी।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रीकरण तथा प्रधानमंत्री कुसुम योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों से संबंधित विभागों से संपर्क कर पात्रता के अनुसार योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।

48 किसानों को सरसों के बीज और कृषि निवेश वितरित...

प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना के अंतर्गत तिलहन क्लस्टर प्रदर्शन के लिए 48 किसानों को सरसों की बीपीएम-11 प्रजाति के बीज वितरित किए गए। इसके साथ ही किसानों को सल्फर, पेंडामेथालिन और कार्बेंडाजिम जैसे कृषि निवेश भी उपलब्ध कराए गए, ताकि वे वैज्ञानिक विधि से सरसों की खेती कर सकें। कार्यक्रम में नारा, मानपुर, जुबरा और आसपास के गांवों से आए किसानों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर किसान अशोक सिंह, सरस्वती शरण दुबे तथा नारा एफपीओ के निदेशक जयप्रकाश पांडेय सहित अन्य किसान मौजूद रहे। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार और प्रदीप कुमार की सहभागिता रही।

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