ब्यूरो रिपोर्ट-जतन सिंह

महोबा : जनपद में सफेद सोने की बस्ती के मजदूर पलायन को मजबूर कभी मुंबई और दिल्ली से व्यापारियों से खचाखच भरी रहने वाली गोराडीह दुर्घटना के बाद यहां की खदानें बंद हो गई जिससे सफेद सोना उत्पन्न करने वाली गौरा जी के मजदूर आज दिल्ली और मुंबई पलायन कर गए हैं गांव में यह मजदूर कभी डाइस 4 की खदानों में काम करते थे और अपना जीवन यापन करते थे परंतु कराने बंद होने के बाद यहां पर बेरोजगारी और भुखमरी का आलम यह है कि यहां की पचास से साठ पर्सेंट लोग रोजी रोटी की जुगाड़ के लिए दिल्ली मुंबई और गुजरात की ओर रुख कर गए हैं पूरे देश में गोरारी के पत्थर की एक धाक थी और यहां के शिल्पकार राष्ट्रपति से पदक भी प्राप्त कर चुके हैं गौरव पत्थर की खदानें बंद हो जाने के बाद यहां के शिल्पकार महंगे दामों से वहां से पत्थर खरीद कर लाते हैं और अपनी कला के प्रदर्शन के लिए मूर्ति मंदिर छोटे-बड़े तमाम तरह के स्ट्रक्चर बना पाते हैं श्री परमानंद तिवारी बताते हैं कि कि हमारा 1974 में पड़ा हुआ था परंतु दुर्घटना के बाद गौरी का शासन के द्वारा बंद कर दी गई है जिससे हम लोग केवल खेती किसानी पर निर्भर हो गए ।
श्रृंगी ऋषि आश्रम जहां राम को पाने के लिए आये थे दशरथ...

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