ब्यूरो रिपोर्ट-जतन सिंह

महोबा : जनपद में विकास कार्य के नाम पर बिगड़ता कस्बा का अतीत देशी रियासत के समय बसा शहरीकरण पर ऐतिहासिक नगरी की चौड़ी सड़कें तंग रह गलियों में तब्दील, बिना विनिमय क्षेत्र की स्वीकृति से हो रहा नगर पालिका परिषद का विकास कार्य, कार्ययोजना के समय मौजूद नहीं रहती निर्माण की निगरानी टीम, कस्बा में अतिक्रमण बढ़ने से चौडी सड़कें बनी तंग गलियाँ बन गयी वही खेलकूद के मैंदान, सार्वजनिक मैदान,चौपाल व चौगान, नाला, पोखरें भी अतिक्रमण की चपैट से गृस्त है। रियासत काल के समय कस्बा में हर पचास मीटर पर चौगान चौरहा व सार्वजनिक मैदान थे वही राजाओं ने कस्बा को शहरीकरण का स्वरूप बसाया था जिसमें नाला,नालियो पोखरों का तालाब आन्तरिक जुड़ाव सड़कों पटरियो से भवनों की दूरी से साथ बसाया था।लेकिन आजादी के बाद पालिका अधिपत्य आया कस्बा बदहाली में बदलता गया। नगर पालिका परिषद व लोक निर्माण विभाग की सड़कों के किनारें सार्वजनिक पटरियों में अतिक्रमण होने से यह चौडी सड़कें तंगी गलियाँ बन गयी है, खाश बात यह हैं कि अतिक्रमणकारी स्वंय नाली खोद कर इन विभागों की सीमा तय कर है। कस्बा के अन्दर वार्डों व मुहल्लो की सड़कों की भी यही दशा है यहाँ तक मुहल्लों के सार्वजनिक मैदान चौपाल,खेलकूद शादी विवाह बच्चों के खेलकूद के लिए खाली मैंदान लुप्त हो गये है ज्यादातर इन स्थलों में अतिक्रमणकारियों ने जबरन चार दिवारी बना कब्जा कर लिया हैं, कस्बा के सामाज सेवी विधा मंदिर इंटर कालेज के उपाध्यक्ष रमेश दीक्षित ने कहा कस्बा के मुहल्लो के बड़े बड़े मैदान अतिक्रमण की चपैट में विलुप्त हो गये है, वही मंड़ी तिरहा से वी पार्क तक सड़क किनारे बन रहे नाला को भवनों के किनारे बनबाने की माँग की है जिसमें यह मार्ग चौड़ा रहे आवागमन को परेशानी न हो सके।
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