ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
कौशाम्बी : जनपद में हमेशा से यमुना नदी के घाटों पर बालू के अवैध खनन और ओवरलोडिंग का मामला सुर्खियों में रहा है, हमेशा से बालू माफिया और ओवरलोड माफिया कौशाम्बी में अपना अड्डा जमाए रहते हैं लेकिन जिम्मेदारों द्वारा कार्यवाही के नाम पर सिर्फ दिखावा ही नजर आता है ।
आपको बता दें कि इन दिनों जनपद कौशाम्बी के चायल सर्किल में ओवरलोड वाहनों की बाढ़ आ गई है, यमुना नदी के घाटों से निर्यात हो रही बालू को ओवरलोडिंग करके ओवरलोड माफिया रोजाना हजारों गाड़ियों को चायल सर्किल की सड़कों से पास कराते हैं, इन ओवरलोड वाहनों में ज्यादातर आधुनिक ट्रके और ट्रैक्टर शामिल है ।हाल ही में पुलिस प्रशासन द्वारा इन ओवरलोड वाहनों पर कार्यवाही करते हुए इन्हें सीज किया गया लेकिन यह महज एक दिखावा था जबकि उन वाहनों को सीज किया गया था जिन से माहवारी नहीं मिल रही थी जिन वाहनों को पास कराने वाले ओवरलोड माफियाओं से जिम्मेदारों की सांठगांठ बनी रहती है उन ओवरलोड वाहनों को बकायदा पुलिस के गाड़ी के सामने से ही निकलने दिया जाता है यह सिलसिला हमेशा से चला आ रहा है, इन दिनों वाहनों पर लदे ओवरलोड बालू को पन्नी और तिरपाल से ढक कर पास कराया जा रहा है, ओवरलोड माफिया के एक करीबी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि वह रोजाना इन ओवरलोड गाड़ियों को पास कराने के लिए माफियाओं की लग्जरी कार से ओवरलोड वाहनों के आगे पीछे लोकेशन में घूमते रहता हैं, उनसे बताया कि चायल सर्किल के थाना क्षेत्रों से गुजरने वाले ओवरलोड वाहनों के संबंध में थाना स्तर के कारखासों से 40 से 50 हजार रुपये की माहवारी पर सेटिंग बनाते हैं जिस कारण उनके द्वारा लोकेशन किए गए ओवरलोड वाहन पर पुलिस कार्यवाही नही करती है, ओवरलोड माफिया प्रत्येक वाहन से 15 सौ से 25 सौ रुपए तक की वसूली कर लेते हैं जिनकी संख्या हजारों में होती है ।
ऐसे में ओवरलोड माफिया राजस्व समेत सरकार द्वारा बनाई गई सड़कों को हानि पहुंचा रहे हैं, जो ओवरलोड वाहन बिना जिम्मेदारों के साठगांठ के सड़कों से गुजरते हैं उन वाहनों पर इनके द्वारा कार्यवाही की खानापूर्ति कर दी जाती है, खास बात यह है कि ओवरलोडिंग बालू निकासी के मामलों में सेटिंग कराने का जिम्मा संबंधित सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के वाहनों के ड्राइवरों की भूमिका अहम भूमिका बताई जा रही है जो पल-पल की खबर ओवरलोड माफियाओं को देते रहते हैं गर इन वाहन चालकों के मोबाइल नंबर जांच के दौरान ट्रेस पर लगाया जाय तो सारा राज उजागर हो सकता है, इन कारनामों से लोगों को एक बात और समझ लेनी चाहिए कि चायल सर्किल के जिम्मेदार अधिकारी ओवरलोड वाहनों को पास कराने के खेल में काफी माहिर हैं ।
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