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न्याय मिला लेकिन जमीन नहीं, चालीस साल पुराने विवाद में पीड़िता परेशान...

रिपोर्ट-जैगम हलीम 

कौशाम्बी : चरवा थाना क्षेत्र के बलीपुर टाटा गांव में जमीन विवाद का एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़िता का आरोप है कि करीब 40 वर्षों से चल रहे मुकदमे में फैसला उसके पक्ष में आने के बावजूद उसे अब तक जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है। न्याय मिलने के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई न होने से पीड़िता परेशान होकर अधिकारियों के चक्कर काट रही है। मामले में दाखिल अतिरिक्त कथन के अनुसार विवादित भूमि पर वादी को कई वर्ष पूर्व पट्टा मिला था। वादी का कहना है कि वह पट्टा मिलने से पहले से ही उक्त भूमि पर कब्जा कर मकान बनाकर रह रही थी और बाद में पट्टे की जमीन को अपने कब्जे वाली भूमि में जोड़ लिया। वादी के अनुसार विवादित भूमि पर उसका लगातार कब्जा रहा है, जहां मकान, बाड़ा और गोशाला भी बनी हुई है। वहीं प्रतिवादी संख्या-6 की ओर से दाखिल बयान में वादी के मकान, गोशाला, सुवरबाड़ा, बरगद के पेड़ और पक्की बाउंड्रीवाल पर किसी प्रकार का दावा न होने की बात कही गई है।

प्रतिवादी ने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि पर वादी का कब्जा बरकरार है और उन्होंने कभी कब्जा करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की। दूसरी ओर प्रतिवादी संख्या-7 और 8 ने न्यायालय में दाखिल प्रतिवाद पत्र में वादी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित भूमि ग्राम सभा की बंजर भूमि है, जो खतौनी में गाटा संख्या 1062ख, रकबा 0.2469 हेक्टेयर के रूप में दर्ज है। उनका आरोप है कि वादी ने अस्थायी कब्जा कर रखा है और झूठे तथ्यों के आधार पर ग्राम सभा की जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2025 को तीन प्रमुख बिंदु तय किए हैं। इनमें यह तय किया जाना है कि क्या वादी विवादित संपत्ति की स्वामी और कब्जेदार है। क्या प्रतिवादी उसके शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप कर रहे हैं और क्या वाद का मूल्यांकन कम किया गया है। फैसले के बाद भी कब्जा न मिलने से पीड़िता ने प्रशासन से न्याय दिलाने और जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की है।

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