ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
कौशाम्बी : चायल तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा सैय्यद सरांवा में तालाबी भूमि पर अवैध कब्जा कराए जाने का मामला सामने आया है। गांव के कुछ ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और डीएम को प्रार्थना पत्र भेजकर हल्का लेखपाल पर तालाबी भूमि की पैमाइश कर कब्जा दिलाने का आरोप लगाया है तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार ग्राम सभा सैयद सरांवा में स्थित तालाबी संख्या 675 एवं 676 राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। आरोप है कि यह भूमि गांव के जल निकासी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां नालियों और नाले का पानी एकत्र होकर पहुंचता है। उत्तम यादव क्षेत्र पंचायत सदस्य, इंद्र भवन सिंह, श्रीचंद्र यादव, मलखान, आदि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 5 जून 2026 को हल्का लेखपाल अनूप कुमार पटेल ने उक्त भूमि की पैमाइश कर उसे गांव निवासी प्रीतम प्रजापति पुत्र राजाराम को ग्राम सभा की भूमि बताते हुए कब्जे के लिए चिन्हित कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, ऐसे में राजस्व लेखपाल द्वारा तालाबी भूमि की पैमाइश कर किसी व्यक्ति को कब्जा दिलाना नियमों के विपरीत प्रतीत होता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तालाबी भूमि पर पूर्व में भी कथित रूप से लेन-देन कर कई लोगों को कब्जा दिलाया गया, जिसके बाद वहां पक्के मकानों का निर्माण हो चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि पक्की सड़क के किनारे स्थित है और यहां मिट्टी डालकर अवैध कब्जा किए जाने से जल निकासी पूरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि तालाब और नाले की भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहा तो बरसात के मौसम में गांव में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
इससे ग्रामीणों के आवागमन, खेती-बाड़ी और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि तालाबी संख्या 675 और 676 की वास्तविक स्थिति की राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों से जांच कराई जाए। साथ ही हल्का लेखपाल द्वारा की गई पैमाइश और कथित कब्जा दिलाने की कार्यवाही की भी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। फिलहाल मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है और वे प्रशासन से तालाबी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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