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हज़रत अली असगर की याद में निकला झूला, अमन-भाईचारे का दिया संदेश

रिपोर्ट-जैगम हलीम 

प्रयागराज‌ : सदर क्षेत्र के बम्हरौली स्थित छोटी मस्जिद इमामबाड़े में 7 मोहर्रम के अवसर पर हज़रत अली असगर (अ.स.) का झूला पूरे शान-ओ-शौकत और अकीदत के साथ निकाला गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शामिल होकर करबला के मासूम शहीद हज़रत अली असगर को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। रौशनियों, फूलों और आकर्षक सजावट से सजे झूले को पूरे क्षेत्र में ग़म और एहतराम के माहौल में उठाया गया। "या हुसैन" की सदाओं और नौहाख्वानी के बीच अज़ादारों ने करबला के उस दर्दनाक मंजर को याद किया, जब छह माह के मासूम हज़रत अली असगर ने प्यास की हालत में शहादत का जाम पिया था। करबला की रिवायतों में झूला हज़रत अली असगर की याद का प्रतीक माना जाता है। जुलूस के दौरान अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया गया। क्षेत्र के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और करबला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए दुआएं कीं।

वक्ताओं ने कहा कि करबला सब्र, हक़ और इंसाफ़ के लिए डटे रहने का पैग़ाम देती है, जबकि हज़रत अली असगर की शहादत मासूमियत और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के लिए शरबत तथा विभिन्न प्रकार के लंगर का भी वितरण किया गया। झूले की आकर्षक सजावट करने वाले हसन रिज़वी की लोगों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुलूस सकुशल संपन्न हुआ, जिसकी क्षेत्रवासियों ने सराहना की।

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