ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
अब कांग्रेस-सपा गठबंधन के उम्मीदवार हैं बसपा ने यहां से जगन्नाथ पाल को मैदान में उतारा है यानी इस सीट पर इस बार लड़ाई पटेल और मौर्य के बीच है। मजेदार बात यह है कि इस भाजपा और सपा दोनों दलों ने पूर्व बसपाई पर भरोसा जताया है। बीजेपी प्रत्याशी प्रवीण पटेल केंद्र और प्रदेश सरकार के विकास कार्यों के बूते जनता के बीच हैं वह पीएम मोदी के चेहरे पर बड़े अंतर से जीत का दावा कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी का कहना है कि बेरोजगार, महंगाई, किसान और नौजवान की समस्याओं पर जनता इंडिया गठबंधन को ही वोट करेगी। सपा नेता का कहना है कि फूलपुर सीट पर कई बार समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। इसलिए इस बार भी फूलपुर की प्रतिष्ठित सीट इंडिया गठबंधन के खाते में जाएगी। फूलपुर आजादी के बाद से ही वीवीआईपी सीटों में शुमार रही है यह पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की राजनीतिक कर्मभूमि रही है, आजादी के बाद लगातर तीन बार 1951, 1957 और 1962 में फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर पंडित नेहरू ने देश का नेतृत्व किया ।
उनके बाद इस सीट पर 1964 और 1967 में विजय लक्ष्मी पंडित, 1969 में जनेश्वर मिश्र, 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह, 1977 में कमला बहुगुणा, 1980 में प्रोफेसर बीडी सिंह, 1984, 1989 और 1991में लगातार तीन बार राम पूजन पटेल विजयी हुए। 1996 और 1998 में जंग बहादुर पटेल, 1999 में धर्मराज पटेल, 2004 में सपा से अतीक अहमद और 2009 में बसपा से कपिलमुनि करवरिया निर्वाचित होकर फूलपुर का प्रतिनिधित्व किया। केशव प्रसाद मौर्य को फूलपुर क्षेत्र की जनता ने पहली बार 2014 में बीजेपी से खाता खोलकर देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजा था। फिर वह 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उपमुख्यमंत्री बने और सांसदी छोड़ दिया, 2018 में हुए उपचुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन से भाजपा की सियासी गणित बिगड़ी और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार हुई और सपा के नागेन्द्र सिंह पटेल जीतकर संसद पहुंच गये थे। सपा के नगेंद्र पटेल ने बीजेपी के उम्मीदवार कौशलेंद्र सिंह पटेल को हराया था, नागेंद्र को 3,43,922 वोट मिले, वहीं कौशलेंद्र 2,83,462 वोट लेकर दूसरे नम्बर पर रहे थे, निर्दलीय चुनाव लड़े बाहुबली अतीक अहमद को 48,094 वोटों से संतोष करना पड़ा था ।
वर्ष 2014 में केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर से तीन लाख से अधिक अंतर से जीते थे, उनको 5,03,564 वोट मिले थे। उन्होंने सपा के धर्मराज पटेल को पराजित किया था बसपा प्रत्याशी कपिल मुनि करवरिया को 1,63,710 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। इसके बाद 2019 में एक बार फिर से यहां से बीजेपी की केशरी देवी पटेल ने जीत दर्ज करी। केशरी देवी पटेल ने सपा-बसपा गठबंधन ने प्रत्याशी पंधारी यादव को 1,71,968 वोटों के अंतर से हरा दिया। फूलपुर में कुल 20 लाख 47 हजार 108 मतदाता हैं. इसमें 11 लाख 11 हजार 564 पुरुष, 9 लाख 35 हजार 239 महिला और 251 थर्ड जेंडर के मतदाता हैं. फूलपुर लोकसभा सीट में कुल पांच विधानसभाएं हैं। इसमें फाफामऊ, सोरांव सुरक्षित और फूलपुर ग्रामीण क्षेत्र की विधानसभाएं हैं ।
इसमें इलाहाबाद पश्चिम और इलाहाबाद उत्तर शहरी क्षेत्र की दो विधानसभाएं शामिल हैं इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 4 लाख 60 हजार 205 मतदाता हैं। जातीय समीकरण की अगर बात करें तो फूलपुर लोकसभा सीट पर पटेल मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। फूलपुर लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा करीब 3 लाख पटेल मतदाता हैं दूसरी नंबर पर दो लाख 75 हजार यादव मतदाता हैं। जबकि तीसरे नंबर पर ब्राह्मण 2 लाख 50 हजार और एससी-एसटी मतदाता 2 लाख 50 हजार हैं कायस्थ मतदाता 85 हजार और मौर्या व पाल मतदाता 70-70 हजार हैं शेष वैश्य और अन्य जातियों के वोटर शामिल हैं ।
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