रिपोर्ट-प्रदीप कुमार
कौशाम्बी : मूरतगंज बाजार स्थित ऐतिहासिक पक्का तालाब का सुंदरीकरण कार्य करोड़ों की उम्मीदों के बावजूद अधर में लटका हुआ है। लगभग 300 वर्ष पुराने इस तालाब के लिए शासन से करीब 30 लाख रुपये स्वीकृत हुए, लेकिन धरातल पर कार्य अधूरा ही दिखाई दे रहा है। इसके चलते क्षेत्र में गंदगी और बदबू का माहौल बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शेरगढ़ (मूरतगंज) के सेठ चमरू लाल द्वारा लगभग आठ बीघा भूमि दान देकर इस तालाब का निर्माण कराया गया था। पांच बीघे में फैले इस तालाब के पास राम-जानकी मंदिर और शिवाला भी बनवाया गया था। समय के साथ देखरेख के अभाव में यह धरोहर जर्जर होती चली गई।
सीढ़ियों के पत्थर टूट चुके हैं और तालाब को नालों से जोड़ दिए जाने के कारण इसकी स्थिति और खराब हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2019 में मिले 26 लाख रुपये के बजट का समुचित उपयोग नहीं हुआ। मौके पर केवल सबमर्सिबल पंप की बोरिंग और कुछ सीढ़ियों पर प्लास्टर ही दिखाई देता है, जिसकी लागत करीब पांच लाख रुपये आंकी जा रही है। शेष धनराशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासी रिंकू पंडा सहित अन्य लोगों का कहना है कि तालाब के आसपास टाइल्स, हरियाली और सफाई की व्यवस्था नहीं है।
वहीं पास बने भवन में गंदगी फैलाई जाती है और देखरेख के लिए कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं है। मंदिर के पुजारी ने भी आरोप लगाया कि असामाजिक तत्व वहां डेरा जमाए रहते हैं और विरोध करने पर धमकी देते हैं। लोगों ने प्रशासन की उदासीनता पर चिंता जताते हुए इस ऐतिहासिक धरोहर के सुंदरीकरण और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
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