रिपोर्ट-इरसाद हुसैन
महोबा : जनपद में दीपावली के पावन अवसर पर गोवर्धननाथ जी महाराज मेला, चरखारी में बुंदेलखंड की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा मोनिया नृत्य की भव्य झलक देखने को मिली। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से कई दर्जन से अधिक मोन-मोनिया नृत्य दल भगवान गोवर्धननाथ जी के दर्शन हेतु चरखारी पहुंचे और आस्था व भक्ति से परिपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। यह नृत्य बुंदेलखंड की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा का प्रतीक माना जाता है। मोनिया नृत्य भगवान श्रीकृष्ण के ग्वाल बालों की लीलाओं का जीवंत प्रदर्शन है। नृत्य में भाग लेने वाले श्रद्धालु ग्वाल बाल मौन व्रत धारण कर नंगे पैर देव स्थानों पर पहुंचते हैं और नृत्य के माध्यम से भगवान को रिझाते हैं।
मोनिया नृत्य साधना और समर्पण का प्रतीक है। नर्तक अपनी कमर में घठिया (सुपारी बंधी डोरी) बांधते हैं, जो संकल्प और साधना का प्रतीक माना जाता है। ग्वाल बाल मोरपंख, लठ, मुगदर लेकर कृष्ण लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं। परंपरा के अनुसार, 12 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर घठिया की गांठ वृंदावन में खोली जाती है और गांव लौटकर भंडारा कराया जाता है। दर्शनार्थियों ने मोनिया नृत्य की भक्ति, अनुशासन और परंपरा से भरे इस अनूठे संगम की सराहना करते हुए कहा कि यह बुंदेलखंड की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है।
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