ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
प्रयागराज : संगम की रेती पर चल रहे माघ मेला–2026 के दौरान इन दिनों साधु-संतों के बीच कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन द्वारा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज को स्नान से रोके जाने के बाद मेला क्षेत्र में धार्मिक और वैचारिक हलचल तेज हो गई है। इस घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी लगातार अनशन पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन अपनी गलती स्वीकार करे, उनसे क्षमा मांगे और उन्हें विधिवत स्नान कराया जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बीच साधु-संतों के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। जहां एक वर्ग शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है, वहीं कुछ साधु-संत उनसे नाराजगी भी जता रहे हैं। इसी बीच माघ मेले में आए अनेक संतों ने वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज को सर्वोच्च संत बताते हुए उनकी जमकर सराहना की है। साधु-संतों का कहना है कि कलयुग में यदि कोई संत निस्वार्थ सेवा और सच्चे वैराग्य का प्रतीक हैं, तो वे प्रेमानंद महाराज हैं। संतों ने बताया कि प्रेमानंद महाराज ने कभी धन के लिए कथा, प्रवचन या आयोजन नहीं किया। उनका स्पष्ट मत रहा है कि सेवा निस्वार्थ होनी चाहिए और जो श्रद्धालु स्वयं आकर सहयोग करे, उसी में संतोष रखना चाहिए। उन्होंने हमेशा आडंबर, चंदा, रसीद और कथित संस्थागत दिखावे का विरोध किया है।
भरवारी खालसा के राजेंद्र बाबा ने कहा, हम पिछले 56 वर्षों से प्रयाग की धरती पर आते-जाते रहे हैं, लेकिन प्रेमानंद महाराज जैसा संत हमने कभी नहीं देखा। उन्होंने कभी वृंदावन छोड़कर प्रचार या प्रसिद्धि के लिए यात्राएं नहीं कीं। वे सीधे राधारानी की शरण में रहते हैं। आज के समय में ऐसे संत दुर्लभ हैं। माघ मेले में मौजूद साधु-संतों ने माघ मेला–2026 की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में माघ मेले की व्यवस्थाएं पहले से कहीं बेहतर हुई हैं। संतों ने कहा कि धर्म, संस्कृति और संत समाज के सम्मान को बनाए रखने में सरकार की भूमिका सराहनीय है।
अंत में संतों ने प्रेमानंद महाराज, संत समाज और राजा प्रयाग के जयकारों के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। संत समाज का कहना है कि प्रेमानंद महाराज जैसे संत समाज के लिए प्रेरणा हैं और उनकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम
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