ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
प्रयागराज : माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की नाराज़गी और उनका अनशन अब सियासी रंग लेने लगा है। मौनी अमावस्या से शुरू हुए अनशन को लेकर सत्ता पक्ष के विरोधी नेता खुलकर समर्थन में सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला शंकराचार्य से मिलने प्रयागराज पहुंचे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या से अब तक अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें ससम्मान स्नान कराया जाए तथा उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर शासन-प्रशासन के अधिकारी उनसे सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें। शंकराचार्य से मुलाकात और आशीर्वाद लेने के बाद शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि महराज जी के साथ शासन-प्रशासन में बैठे लोगों ने बहुत गलत व्यवहार किया है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य संत हैं और क्षमा करना उनका स्वभाव है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि उनके सम्मान से खिलवाड़ किया जाए। वाघेला ने मांग की कि शासन को तुरंत माफी मांगनी चाहिए और शंकराचार्य को ससम्मान स्नान कराना चाहिए।
बीजेपी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप...
मीडिया से बातचीत में वाघेला ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भीतर आपसी खींचतान का खामियाजा संत समाज को भुगतना पड़ा है। उन्होंने कहा, बीजेपी के अंदर का सिस्टम ऐसा है कि आपसी लड़ाइयों में गलत फैसले होते हैं। उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य जी के साथ जो हुआ, वह उसी का परिणाम है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस तरह अन्य राज्यों में शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाने की कोशिश की गई, उसी मानसिकता के तहत यहां भी हालात बिगाड़े गए।
पूर्व मुख्यमंत्री का गौरक्षा के मुद्दे पर भी हमला...
पूर्व मुख्यमंत्री ने गौरक्षा के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरते हुए कहा कि जो लोग गौहत्या करने वालों से चंदा लेते हैं या उन्हें सब्सिडी देते हैं, वे भी पाप के भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि जनता को यह सोचना चाहिए कि “डबल इंजन सरकार” वास्तव में किसके हित में काम कर रही है।
जानिए आखिर कौन हैं शंकर सिंह वाघेला...
गुजरात के दिग्गज राजनेता शंकर सिंह वाघेला, जिन्हें समर्थक ‘बापू’ कहकर संबोधित करते हैं, राज्य की राजनीति में एक अहम चेहरा रहे हैं। वो साल 1996 से 1997 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं।
आरएसएस से हुई थी वाघेला के राजनीतिक जीवन की शुरुआत...
शंकर सिंह वाघेला भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी जैसे दलों में अपनी अहम भूमिका निभा चुके हैं, वे केंद्र सरकार में कपड़ा मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में ‘प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी’ के माध्यम से सक्रिय हैं लगभग 86 वर्ष की उम्र में भी राजनीतिक सक्रियता और बयानों को लेकर वे लगातार चर्चा में बने रहते हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अनशन पर राजनितिक असर...
वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में एक बड़े और अनुभवी नेता का प्रयागराज पहुंचना इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी और तूल पकड़ सकता है।
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