ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
मुम्बई : फिल्मी दुनिया में कई ऐसे गीत बने हैं जो समय के साथ सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहे, बल्कि लोगों के जीवन का हिस्सा बन गए। ऐसा ही एक गीत है 1968 में आई फिल्म सरस्वतीचंद्र का छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए। इस गीत के बोल मशहूर गीतकार इंदीवर ने लिखे थे, जबकि संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने इसे अपने सुरों से सजाया। लता मंगेशकर की मधुर आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया। फिल्म में नूतन और मनीष ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जहां मनीष ने असीम और नूतन ने कुमुद का किरदार निभाया था। बताया जाता है कि उस दौर में यह गीत उन लोगों के लिए संबल बना, जो प्यार में टूट चुके थे या बिछड़ने का दर्द झेल रहे थे। कई लोग इस गाने में अपनी कहानी देखने लगे और उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उनकी भावनाओं को समझ रहा हो। यही वजह रही कि यह गीत सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा बन गया।
कुछ कथनों के अनुसार, इस गीत ने अनजाने में ही कई लोगों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने से भी रोका। हालांकि, यह दावा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है, लेकिन इसकी लोकप्रियता और भावनात्मक असर को नकारा नहीं जा सकता। लता मंगेशकर की आवाज की खासियत रही है कि वे हर भाव को इतनी गहराई से प्रस्तुत करती थीं कि श्रोता खुद को उससे जोड़ लेते थे। यही कारण है कि उनके गाए गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
आज के दौर में भी जब लोग भावनात्मक तनाव से गुजरते हैं, तो ऐसे गीत उन्हें सुकून देने का काम करते हैं। “छोड़ दे सारी दुनिया…” इसी कड़ी का एक ऐसा गीत है, जिसने समय के पार जाकर लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बना ली है।
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