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चरखारी के मेले में होता है भगवान गोवर्धननाथ जी की विभिन्न लीलाओं का मंचन, 139 साल पुराना है मेला...

ब्यूरो रिपोर्ट-जतन सिंह 

महोबा : जनपद में चरखारी मेला सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ जी जो अपने 139 वें वर्ष में अपनी प्राचीन और धार्मिक परंपरा का निर्वहन कर रहा है, रियासत कालीन समय से ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को समेटे हुए है उपरोक्त मेले को अभी तक सरकारी मेले का दर्जा प्राप्त ना होने की वजह से बजट का अभाव है, जिसकी वजह से इस वर्ष मेले में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में कोताही बरती जा रही है, स्थानीय जनप्रतिनिधि निरंतर इस मेले को भव्य स्वरूप देने के लिए प्रयासरत रहते हैं, जिसकी वजह से बजट के अभाव में भी मेले में होने वाले सभी कार्यक्रमों को पूरी धार्मिक मर्यादा अनुसार संपन्न कराया जा रहा है, स्थानीय वासियों को इस सरकार और वर्तमान जनप्रतिनिधियों से मेले को सरकारी मेले में शामिल करवाकर मेले के लिए आवश्यक बजट मिलवाने की बड़ी आशाएं हैं, जिससे बुंदेलखंड का यह धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का मेला अपने प्राचीन वैभव को पुनः प्राप्त कर सके, बताते चलें चरखारी मेला चरखारी नरेश मलखान सिंह जूदेव द्वारा वर्ष 1883 में प्रारंभ करवाया गया था, मेले में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का मंचन इस प्रकार किया जाता है कि संपूर्ण मेला परिसर कृष्ण भक्ति के रस में डूबा नजर आता है, मेले में जहां भगवान सहस्त्र श्री गोवर्धननाथजी विशाल दिव्य मेला मंदिर में विराजते हैं वहीं उनके दोनों तरफ 108 राधा कृष्ण मंदिरों की देव प्रतिमाएं मंदिर श्री गोवर्धन नाथ जी के मेला मंदिर को एक अलौकिक स्वरूप प्रदान करते हैं, कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव उत्थान एकादशी अथवा देवउठनी एकादशी हरि प्रबोधिनी एकादशी का सनातनी महत्व है कहते हैं इस दिन माता तुलसी का भगवान श्री हरि विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से विवाह संपन्न हुआ था यह भी कहते हैं कि भगवान श्री हरि विष्णु चतुर्मास की निद्रा पूर्ण करने के उपरांत देवउठनी एकादशी को जागृत होने के उपरांत पुनः सृष्टि के कार्यों को देखते हैं, चतुर्मास में भगवान भोलेनाथ सृष्टि को चलाते हैं ऐसी मान्यता है, हरि प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी से समस्त मांगलिक कार्य पुनः प्रारंभ हो जाते हैं, कार्तिक मास सनातनियों में भगवान श्री कृष्ण की पूजा उपासना करने का मास है, पूरे कार्तिक मास में मेला सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ जी मैं कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं का तांता लगा रहता है जिसमें देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है इस दिन समूचे बुंदेलखंड क्षेत्र से कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं भगवान श्री गोवर्धन नाथ जी की परिक्रमा करने चरखारी मेले में आती हैं, हजारों की संख्या में माताएं बहने जब पूरे श्रद्धा एवं भक्ति भाव में डूब कर पूजा अर्चना करते हुए भगवान गोवर्धन नाथ जी के परिसर में कार्तिक गीतों को गाते हुए परिक्रमा करती हैं तो बरबस ही निकल पड़ता है कार्तिक मास पुण्य का महीना, मेला लगे इतै भारी, वृंदावन भई चरखारी,
मेला परिसर में 1 नवंबर से श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा 2 नवंबर से चल रही है, श्री विष्णु महायज्ञ धर्मगुरु धर्म प्रवर मुख्य आचार्य पंडित रमाकांत कौशिक जी महाराज के निर्देशन में संपन्न किया जा रहा है तो वही श्रीमद् भागवत कथा का वाचन बृजवासी भागवत आचार्य पंडित योगेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के श्री मुख से हो रहा है, मेला सहस्त्र श्री गोवर्धननाथजी में आज एकादशी के दिन भारी संख्या में भीड़ एकत्र हुई सभी श्रद्धालु भक्तजनों द्वारा मंदिर के दर्शन किए गए एवं परिवार के सुख, समृद्धि की कामना की गई, नगर पालिका द्वारा मेले में विष्णु महायज्ञ एवं रासलीला, भागवत कथा का आयोजन कराया जा रहा है, हरि प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर मेला परिसर में उप जिलाधिकारी चरखारी श्वेता पांडे, तहसीलदार चरखारी, नायब तहसीलदार चरखारी, नगर पालिका अध्यक्ष मूलचंद अनुरागी एवं नगरपालिका कर्मचारी और गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति कहती हैं ।

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