रिपोर्ट-न्यूज़ एजेंसी
लखनऊ : हमारे वैज्ञानिक ऋषि मुनि धरती की गूढ़ रासायनिक संक्रियाओं को समझते थे, इसलिए उन्होंने खड़ाऊ का आविष्कार किया था, बताते चलें कि आपको गर्व होगा खड़ाऊ के पीछे का विज्ञान जानकर गुरुत्वाकर्षण का जो सिद्धांत वैज्ञानिकों ने बाद में प्रतिपादित किया उसे हमारे ऋषि मुनियों ने काफी पहले ही समझ लिया था, उस सिद्धांत के अनुसार शरीर में प्रवाहित हो रही विधुत तंरगे गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं, यह प्रक्रिया अगर निरंतर चलें तो शरीर की जैविक शक्ति वाइटल्टी फोर्स समाप्त हो जाती है, इसी जैविक शक्ति को बचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने खडाऊं पहनने की प्रथा आरम्भ की ताकि शरीर की विधुत तरंगों का पृथ्वी की अवशोषण शक्ति के साथ सम्पर्क न हो सके, इसी सिद्धांत के आधार पर खडाऊं पहनी जाने लगी, यें चीजें जानकर हमें अपने पूर्वजों पर गर्व होता है और दुःख होता है कि आज के तथाकथित सभ्य समाज को अपना इतिहास केवल माइथोलॉजी नजर आता है ।
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