Ticker

6/recent/ticker-posts

सावित्रीबाई फुले की मनाई गई जयंती, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फूले फाउंडेशन ने आयोजित किया कार्यक्रम...

ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह 

कौशाम्बी : जनपद में काजीपुर के जुनैदपुर में क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फूले फाउंडेशन के तत्वावधान में शिक्षा की देवी कही जाने वाली भारत की महान विभूति सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई, इस अवसर पर मौजूद रहे फॉउंडेशन के लोगों ने सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पण कर उन्हे याद किया साथ ही लड्डू का भोग लगाकर सावित्रीबाई फुले अमर रहे अमर रहे के नारे लगाए, इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद रहे स्थानीय लोगों द्वारा उन्हे याद किया गया, आपको बतादें कि बुधवार 3 जनवरी को काजीपुर के जुनैदपुर में क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फूले फाउंडेशन के तत्वावधान में शिक्षा की देवी कही जाने वाली भारत की महान विभूति सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई, इस कार्यक्रम में शिव मोहन मौर्या अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक प्रयागराज कौशाम्बी, सम्राट फॉउंडेशन की राष्ट्रीय महासचिव मंजू मौर्या, जमीनी नेता लाखनराज पासी एवं जिला पंचायत सदस्यों द्वारा अतिथि के तौर पर हिस्सा लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया गया, कार्यक्रम में शिव मोहन मौर्या ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा के लिए नई ज्योति जलाई थी ।

उन्होने सर्वप्रथम महिलाओं के लिए महिला विद्यालय की नीव रखी थी इसी क्रम में आगे बताया कि सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में हुआ था, साल 1840 में मात्र 9 साल की उम्र में उनका विवाह 13 साल के ज्योतिबा राव फुले से हो गया था बचपन में सावित्री बाई फुले अनपढ़ थीं उनके पति मात्र कक्षा 3 तक पढ़े थे फिर उन्होंने अपने पति से शिक्षा ग्रहण की और बाद में साल 1848 में पुणे में नारी शिक्षा के लिए उन्होंने पहला स्कूल खोला था, आगे लाखनराज पासी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उन दिनों समाज सुधार के लिए अनेकों कार्य किए थे उन्होंने शिक्षा के साथ ही बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई थी साथ ही विधवा विवाह, सती प्रथा को लेकर भी वो मुखर रहीं, अपने जीवन काल में उन्होंने भारी विरोध और कठिन समस्यायों के बावजूद समाज सुधार के लिए लगातार संघर्ष किया, कार्यक्रम के अंत में मंजू मौर्या ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का सारा जीवन समाज सेवा और नारी शिक्षा के लिए समर्पित रहा है ऐसी देवी स्वरूपा महान आत्मा को हम सब आज उनके जन्म दिवस पर स्मरण करते हैं ।

कार्यक्रम के अंत में मौजूद रहे सभी लोगों को प्रसाद रूपी भोजन खिलाकर सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस की बधाई दी गई, पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन चंद्रशेखर राजपूत ने करते हुए मौजूद लोगों को बांधे रखा, कार्यक्रम में विशेष तौर पर अनिल कुशवाहा, शिव भवन कुशवाहा, दीपक सिंह, देवा सरोज, ज्ञान सिंह कुशवाहा, राजकुमार मौर्या, हर्ष वर्धन कुशवाहा, निशान मौर्या, सुनील कुशवाहा, भोलानाथ कुशवाहा आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे ।

Post a Comment

0 Comments