रिपोर्ट-नरेन्द्र सिंह
प्रयागराज : अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) उत्तर प्रदेश प्रयागराज के कार्यालय में कथित स्वैच्छाचारिता और मनमानी को लेकर शिकायतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस संबंध में कई बार शिकायतें भेजे जाने के बावजूद अब तक उच्चस्तरीय जांच न होने पर शिकायतकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि आईजीआरएस पोर्टल पर संदर्भ संख्या 18175250237742 के तहत मामले की आख्या अपलोड की गई, जिसे शिकायतकर्ताओं ने मनमानीपूर्ण बताते हुए उस पर आपत्ति भी दर्ज कराई। इसके बावजूद न तो किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई गई और न ही संबंधित प्रकरण में कोई ठोस कार्यवाही हुई। शिकायत में विशेष रूप से अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय में कार्यरत वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2 श्री आशुतोष श्रीवास्तव की तैनाती को नियमों के विरुद्ध बताया गया है। आरोप है कि वे लंबे समय से एक ही विभाग में तैनात हैं, जो शासनादेशों के विपरीत है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव द्वारा की गई संस्तुति का भी हवाला दिया गया है, जिसमें संबंधित कर्मचारी की तैनाती को नियमों के खिलाफ बताते हुए नियमानुसार कार्यवाही की अपेक्षा जताई गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अब तक इस संस्तुति पर भी कोई अमल नहीं किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फूलपुर के विधायक दीपक पटेल ने भी पार्टी लेटरपैड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच और कार्यवाही की मांग की है। बावजूद इसके अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए तथा गलत आख्या प्रस्तुत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए। साथ ही नियम विरुद्ध तैनाती को समाप्त करते हुए संबंधित कर्मचारी को तत्काल हटाया जाए। गौरतलब है कि शासन द्वारा पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि किसी भी शिकायत की जांच आरोपी अधिकारी से नहीं कराई जानी चाहिए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
इसके बावजूद यदि ऐसा हो रहा है, तो यह शासनादेश का स्पष्ट उल्लंघन माना जाएगा। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और कब तक कार्यवाही होती है।
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