रिपोर्ट-जैगम हलीम
कौशाम्बी : उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए गए तालाबों की जमीनी हकीकत कई जगहों पर सवालों के घेरे में है। ऐसा ही एक मामला जनपद कौशाम्बी के विकास खंड मूरतगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहिउद्दीनपुर गौस से सामने आया है, जहां लाखों रुपए की लागत से निर्मित अमृत सरोवर भीषण गर्मी शुरू होने से पहले ही पूरी तरह सूख गया है। मिली जानकारी के अनुसार, इस सरोवर का निर्माण जिला पंचायत विभाग के माध्यम से कराया गया था। योजना का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना, भूजल स्तर को सुधारना और गर्मी के मौसम में पशु-पक्षियों को पानी उपलब्ध कराना था। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और सही मॉनिटरिंग के अभाव में यह सरोवर अपने उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तालाब में एक बूंद पानी तक नहीं बचा है, जिससे आसपास के पशु-पक्षी और वन्य जीव पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
भीषण गर्मी के चलते क्षेत्र में जल संकट और भी गंभीर हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण के समय गुणवत्ता और जल संरक्षण के उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण तालाब पानी रोकने में असफल रहा। यह स्थिति न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है, बल्कि जल संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजना की सफलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी जल स्रोत तैयार करना था, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में कमी साफ नजर आ रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सरोवर की तत्काल मरम्मत कर उसे पानी से भरवाया जाए, ताकि पशु-पक्षियों को राहत मिल सके और क्षेत्र में जल स्तर को संतुलित किया जा सके। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता से लेता है और क्या अमृत सरोवर योजना को वास्तविक रूप से सफल बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
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