रिपोर्ट-फैजी जाफरी
कौशाम्बी : संदीपन घाट थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां जिस बेटे को परिवार जिंदा समझकर पांच दिनों तक तलाश करता रहा, उसी युवक का पुलिस ने “लावारिस” मानकर अंतिम संस्कार कर दिया। युवक की तस्वीर देखने के बाद मां बेसुध हो गई और पूरे परिवार में कोहराम मच गया। घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, संदीपन घाट थाना क्षेत्र के पन्नोई गांव निवासी 20 वर्षीय मंजेश कुमार पुत्र संतोष कुमार 14 मई की शाम करीब सात बजे घर से निकला था। उसने अपनी मां शीला देवी को फोन कर बताया था कि वह काम पर जा रहा है। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया और वह घर वापस नहीं लौटा। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर रिश्तेदारियों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
लगातार पांच दिनों तक खोजबीन करने के बाद 19 मई को परिजन संदीपन घाट थाने पहुंचे और गुमशुदगी दर्ज कराने की बात कही। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस ने उन्हें एक अज्ञात युवक के शव की तस्वीर दिखाई। तस्वीर देखते ही मां शीला देवी बदहवास होकर गिर पड़ीं, क्योंकि वह शव उनके बेटे मंजेश का था।
परिजनों के अनुसार, पुलिस ने बताया कि 14 मई को अमनी लोकपुर गांव के सामने रेलवे ट्रैक पर एक युवक का क्षत-विक्षत शव मिला था। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया और पहचान न होने पर 18 मई को गौसपुर गंगा घाट पर लावारिस मानकर दफना दिया गया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। मां शीला देवी ने जिलाधिकारी कौशाम्बी को शिकायती पत्र देकर बेटे का शव वापस दिलाने और विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराने की मांग की है। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शव की पहचान कराने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए और न ही सूचना को व्यापक रूप से प्रसारित किया।
मृतक के भाई सोमनाथ और मां शीला देवी ने हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि मंजेश किसी प्रकार के तनाव में नहीं था। आरोप लगाया कि किसी ने उसकी हत्या कर शव रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया, ताकि मामला आत्महत्या प्रतीत हो। परिजनों ने मृतक के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड सीडीआर की जांच कराने की मांग की है।
फिलहाल गांव में शोक का माहौल है और परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।
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