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सफेद और काले कोट की जंग, एसआरएन अस्पताल बना अखाड़ा...

रिपोर्ट-जैगम हलीम 

प्रयागराज : स्वरूप रानी नेहरू एसआरएन अस्पताल बुधवार को उस समय रणभूमि में तब्दील हो गया, जब डॉक्टरों और अधिवक्ताओं के बीच शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। अस्पताल परिसर में हुई मारपीट, हंगामे और भगदड़ ने न केवल मरीजों और तीमारदारों को दहशत में डाल दिया, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, सुरक्षा और जिम्मेदार वर्गों के आचरण पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, एक महिला अधिवक्ता अपने परिजन को इलाज के लिए एसआरएन अस्पताल लेकर पहुंची थीं। इसी दौरान किसी बात को लेकर डॉक्टरों और अधिवक्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते उग्र विवाद में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अस्पताल परिसर में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हालात बेकाबू हो गए। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में सफेद कोट पहने कुछ लोग काले कोट पहने अधिवक्ताओं के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं अधिवक्ताओं ने भी डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर अभद्रता और हमला करने के आरोप लगाए हैं।

हंगामे के दौरान अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। मरीज और तीमारदार भयभीत होकर इधर-उधर भागते नजर आए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने भीड़ हटाकर अस्पताल परिसर में शांति व्यवस्था बहाल कराई। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर लगातार बढ़ रहे विवाद क्या संवादहीनता का परिणाम हैं क्या सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी कमजोर पड़ रही है। क्या जिम्मेदार और शिक्षित वर्ग भी अब संयम खोते जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अस्पताल में पहले भी तीमारदारों और कर्मचारियों के बीच विवाद की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इस मामले में किस पक्ष की कितनी गलती है। इसका स्पष्ट निष्कर्ष जांच और सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद ही निकल सकेगा।

घटना के बाद अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया। अस्पताल परिसर और आसपास देर शाम तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल, जहां लोग जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहां हिंसा और भय का माहौल बनना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब सभी की निगाह प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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