रिपोर्ट-जैगम हलीम
कौशाम्बी : जिले के हर्रायपुर, जूगवा और चंदवारी क्षेत्र में कथित रूप से संचालित अवैध क्लीनिकों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि बिना वैध मेडिकल डिग्री, पंजीकरण और लाइसेंस के कई क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी से कई बार दूरभाष के माध्यम से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने की आशंका बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण ऐसे क्लीनिक बेखौफ होकर संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। नियमों के अनुसार भारत में बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री, राज्य चिकित्सा परिषद में पंजीकरण और आवश्यक लाइसेंस के चिकित्सा सेवाएं देना दंडनीय अपराध है।
स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को ऐसे मामलों में औचक निरीक्षण कर अवैध क्लीनिकों को सील करने तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने का अधिकार है। इसके अलावा आयुर्वेदिक या अन्य पद्धति की डिग्री के आधार पर एलोपैथिक उपचार करना भी नियमों का उल्लंघन माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार क्लीनिक का विधिवत पंजीकरण, आवश्यक अभिलेख तथा संबंधित नियमों का पालन अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में क्लीनिक सील करने, एफआईआर दर्ज करने, जुर्माना लगाने तथा गंभीर मामलों में कारावास तक का प्रावधान है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्साधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर क्षेत्र में संचालित कथित अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चलाने तथा दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
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