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मंझनपुर हत्याकांड में दो लोगों को अजीवन कारावास, पंद्रह साल बाद आया कोर्ट का फैसला...

रिपोर्ट-प्रदीप कुमार 

कौशाम्बी : करीब 15 साल पुराने हत्या के मामले में कौशाम्बी न्यायालय ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 11-11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह सजा पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के बाद हुई है। मामला 23 अप्रैल 2011 का है। मंझनपुर थाना क्षेत्र में सरोज देवी ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि बिजली पावर हाउस के सामान में गड़बड़ी करने से उनके पति ने अभियुक्तों को मना किया था। इसी बात को लेकर अभियुक्तों ने उनके पति की हत्या कर दी। मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए आरोपितों को अवैध तमंचे और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। घटना के संबंध में थाना मंझनपुर में मु0अ0सं0 105/2011 के तहत धारा 302 भादवि तथा गिरफ्तारी के संबंध में मु0अ0सं0 109/2011 और 110/2011 के तहत धारा 3/25 आर्म्स एक्ट में मुकदमे दर्ज किए गए थे। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी के निर्देशन में मानिटरिंग सेल द्वारा मामले की लगातार निगरानी करते हुए प्रभावी पैरवी कराई गई। साक्ष्यपरक विवेचना और प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप 11 सितंबर 2026 को न्यायालय ने चिरंगू उर्फ मनीष जायसवाल पुत्र असर्फी लाल निवासी चक नगर, मंझनपुर और सुरेश पासी पुत्र राम लखन निवासी मगरोहनी, मंझनपुर को हत्या का दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को आजीवन कारावास तथा 11-11 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन की ओर से अभियोजक एडवोकेट सोमेश्वर कुमार तिवारी ने पैरवी की। मामले के विवेचक निरीक्षक सर्वेश कुमार मिश्र और पैरोकार कांस्टेबल अभिषेक कुमार की भी प्रभावी भूमिका बताई जा रही है।

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