Ticker

6/recent/ticker-posts

नवरात्रि के सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा, इनसे मिलता है अभय वरदान का आशीर्वाद...

रिपोर्टर-न्यूज़ एजेंसी 

लखनऊ : शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है मां कालरात्रि सदैव अपने भक्‍तों पर कृपा करती हैं और शुभ फल देती है, इसलिए मां का एक नाम ‘शुभंकरी’ भी पड़ा, मां अपने भक्‍तों के सभी तरह के भय को दूर करती हैं देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां कालरात्रि अभय वरदान के साथ ग्रह बाधाओं को दूर करती हैं, साथ ही आकस्मिक संकटों से भी मुक्ति मिलती है मां कालरात्रि को काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मिृत्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी, रौद्री और धुमोरना देवी के नाम से जाना जाता है, मां की कृपा प्राप्त करने के लिए मां को गंगाजल, गंध, पुष्प, अक्षत, पंचामृत और अक्षत से मां की पूजा की जाती है इसके अलावा मां दुर्गा के इस रूप को गुड़ का भोग लगाया जाता है, देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनकी श्‍वास से अग्नि निकलती है मां के बाल बिखरे हुए हैं इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति चमकती है इन्हें तमाम आसरिक शक्तियां का विनाश करने वाला बताया गया है, देवी भागवत पुराण के अनुसार मां के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल और गोल हैं जिनमें से बिजली की भांति किरणें निकलती रहती हैं और चार हाथ हैं, जिनमें एक में खडग अर्थात तलवार है तो दूसरे में लौह अस्त्र है, तीसरा हाथ अभयमुद्रा में है और चौथा वरमुद्रा में है, मां का वाहन गर्दभ अर्थात गधा है जो समस्त जीव जन्तुओं में सबसे ज्यादा परिश्रमी और निर्भय होकर अपनी अधिष्ठात्री देवी कालराात्रि को लेकर इस संसार में विचरण करा रहा है देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है, नवरात्र के सातवें दिन पूजा करने से मां कालरात्रि अपने भक्तों को काल से बचाती हैं अर्थात उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती है पुराणों में इन्हें सभी सिद्धियों की भी देवी कहा गया है, इसीलिये तंत्र मंत्र के साधक इस दिन देवी की विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं, मां कालरात्रि की पूजा करके आप अपने क्रोध पर विजय प्राप्त कर सकते हैं ।

कालरात्रि माता को काली का रूप भी माना जाता है इनकी उत्पत्ति देवी पार्वती से हुई है सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती है परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है, तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले के लिए नवरात्र का सातवां दिन विशेष महत्वपूर्ण है तंत्र साधना करने वाले मध्य रात्रि में तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं, बताया जाता है कि इस दिन मां की आंखें खुलती हैं पंडालों में जहां मूर्ति लगाकर माता की पूजा की जाती है, सप्तमी तिथि के दिन माता को नेत्र प्रदान किए जाते हैं मां का नाम लेने मात्र से भूत, प्रेत, राक्षस, दानव समेत सभी पैशाचिक शक्तियां भाग जाती है इस दिन पूजा करने से साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित होता है ।

Post a Comment

0 Comments