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पिपरी में किसान यूनियन ने की महापंचायत, चकबंदी भ्रष्टाचार को लेकर किसानों में आक्रोश...

ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह 

कौशाम्बी : जनपद के मखऊपुर-पिपरी क्षेत्र में किसान यूनियन टिकैत गुट के तत्वावधान में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में किसानों ने भाग लेकर अपने ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। महापंचायत में किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की गई। महापंचायत में शामिल किसानों ने बताया कि चायल तहसील खास में धान क्रय केंद्रों की भारी कमी के चलते किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य 2370 रुपये प्रति कुंतल के बजाय 1500 रुपये प्रति कुंतल में धान व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की कि क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए तथा सभी प्रजातियों के धान की खरीद सुनिश्चित की जाए, अन्यथा किसान आर्थिक रूप से और अधिक कमजोर हो जाएगा। किसानों ने प्रयागराज एयरपोर्ट से जुड़ी फोर लेन परियोजना में भूमि अधिग्रहण को लेकर भी नाराजगी जताई। किसानों का आरोप है कि उन्हें सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा नहीं दिया गया।

महापंचायत के माध्यम से मांग की गई कि सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाए तथा बिना मुआवजा दिए किसी भी किसान की भूमि की रजिस्ट्री न कराई जाए। पिपरी ग्राम सभा में हाइवे पर कट न होने की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों और मजदूरों ने कहा कि कट न होने के कारण उन्हें कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। किसानों ने हाइवे पर शीघ्र एक कट दिए जाने की मांग की। इसके साथ ही महापंचायत में चकबंदी विभाग के लेखपाल दीपक सिंह पटेल पर गंभीर आरोप लगाए गए। किसानों ने आरोप लगाया कि लेखपाल चक निर्माण के नाम पर दलालों के माध्यम से अवैध धन उगाही कर रहे हैं और विरोध करने वाले काश्तकारों को आपस में लड़ाया जा रहा है।

किसानों ने बताया कि छह माह पूर्व तत्कालीन एसडीएम आकाश सिंह द्वारा लेखपाल को हटाने की संस्तुति की गई थी, बावजूद इसके उन्हें पुनः तैनात कर दिया गया। किसानों ने लेखपाल को तत्काल हटाने, निष्पक्ष जांच कराने और कानूनी कार्यवाही की मांग की। महापंचायत में किसान यूनियन टिकैत गुट के युवा प्रदेश प्रभारी ठाकुर अनुज सिंह विशेष रूप से शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि किसान विरोधी नीतियों और भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। महापंचायत के अंत में किसानों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।


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