ब्यूरो रिपोर्ट-सुरेश सिंह
कौशाम्बी : जनपद के संदीपन घाट थाना क्षेत्र अंतर्गत महगांव चौकी इलाके में रेलवे लाइन के किनारे स्थित ईंट-भट्ठे के पास उपजाऊ कृषि भूमि से बीते लगभग एक माह से जेसीबी मशीन द्वारा अवैध मिट्टी खनन किए जाने का मामला सामने आया है। इस अवैध खनन का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है, बावजूद इसके खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन करने वाला व्यक्ति स्वयं को प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों का करीबी बताकर क्षेत्र में धौंस जमाए हुए है। बताया जा रहा है कि संबंधित खनन माफिया पूर्व में जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है, जिसके चलते थाना, चौकी और खनन विभाग के अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। इससे साफ प्रतीत होता है कि खनन माफिया के आगे जिम्मेदारों ने घुटने टेक दिए हैं।
सरकारी नियमों के अनुसार यदि कोई किसान अपनी भूमि की मिट्टी बेचना चाहता है तो उसे अनुमति लेकर अधिकतम 5 फीट या साधारण मिट्टी के लिए अधिकतम 2 मीटर / 6.5 फीट तक ही खनन की छूट है। इसके बावजूद महगांव क्षेत्र में इससे कहीं अधिक गहराई तक मिट्टी निकाले जाने का आरोप है, जो नियमों की खुली अवहेलना है। अवैध खनन से न सिर्फ संबंधित खेत बल्कि आसपास की कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है। बारिश के दौरान खुदी हुई जमीन की मिट्टी बहकर अन्य खेतों में भर जाती है, जिससे उनकी उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है। कई किसान मजबूरी में अपनी जमीन की मिट्टी बेचने को विवश हो रहे हैं, जिसका सीधा फायदा खनन माफियाओं को मिल रहा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कौशाम्बी से मांग की है कि इस अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उपजाऊ कृषि भूमि को बचाने के लिए तत्काल प्रभाव से खनन पर रोक लगाई जाए। गौरतलब है कि उपखनिज (परिहार) नियमावली-1963 के तहत साधारण मिट्टी का खनन सामान्य सतह से अधिकतम 2 मीटर तक ही वैध है। इससे अधिक खनन के लिए विशेष परमिट आवश्यक होता है।
बिना अनुमति या निर्धारित सीमा से अधिक खनन को अवैध माना जाता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेता है, या फिर किसानों की उपजाऊ ज़मीनें यूं ही खनन माफियाओं के हवाले होती रहेंगी।
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